भाषा समझ आती है, फिर भी बोलने में अटक जाते हैं
अक्सर लोग मुझसे कहते हैं, “मैं इस भाषा में पढ़ लेता हूँ। लिख भी लेता हूँ। लोग जो कहते हैं, वह भी ज़्यादातर समझ आता है। लेकिन जब मेरी बोलने की बारी आती है, तो मैं अटक जाता हूँ।”
ऐसा तब भी हो सकता है जब किसी को सीखी जा रही भाषा काफ़ी अच्छी आती हो। पढ़ना, लिखना और सुनना मदद करते हैं, लेकिन बोलने के लिए बोलने का अभ्यास भी चाहिए। बातचीत चल रही होती है और उसी बीच आपको शब्द ढूँढ़ने, उन्हें वाक्य में जोड़ने और बोलने होते हैं।
बेहतर बोलना है, तो बोलना पड़ेगा। इसके लिए मेरी अक्सर यही तीन सलाह होती हैं।
1. जिस भाषा को सीख रहे हैं, उसमें लोगों से बात करें
बातचीत के मौके ढूँढ़ें, चाहे आमने-सामने या भाषा विनिमय के ज़रिए। बताएँ कि आपका दिन कैसा चल रहा है, कोई सवाल पूछें या किसी ऐसी बात का ज़िक्र करें जो आपको अच्छी लगी। भाषा को बोलकर इस्तेमाल करने की कोई वजह बनाएँ।
Lingobi के भाषा विनिमय में आप अभ्यास के लिए ऑडियो संदेश भेज सकते हैं और कॉल भी कर सकते हैं। अगर सीधे कॉल करना अभी बड़ा कदम लगता है, तो ऑडियो संदेश से शुरू करना आसान हो सकता है। थोड़ा सोचने, बोलने और फिर सामने वाले का जवाब सुनने का समय मिल जाता है।
2. अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करें और फिर सुनें
फ़ोन या कंप्यूटर पर रिकॉर्डर खोलें और थोड़ी देर बोलें। विषय कुछ आसान हो सकता है: आज का दिन कैसा जा रहा है, कल क्या किया या अपनी बनाई हुई कोई कहानी। इसके लिए साथी की ज़रूरत नहीं है और किसी और को रिकॉर्डिंग सुनाने की भी ज़रूरत नहीं है।
इसके बाद रिकॉर्डिंग सुनें। अगर कहीं अटके थे, तो ध्यान दें कि कहाँ अटके और क्यों। क्या कोई शब्द नहीं आ रहा था? शब्द जानते थे, पर वाक्य बनाने में मुश्किल हुई? क्या कोई ऐसी बात थी जिसे आसानी से लिख सकते थे, लेकिन बोल नहीं पाए?
काम करने के लिए एक चीज़ चुनें, जो कमी रह गई थी उसे खोजें और उस हिस्से को फिर से रिकॉर्ड करके देखें। इससे अभ्यास के लिए एक साफ़ दिशा मिलती है। समय के साथ पुरानी रिकॉर्डिंग भी सुन सकते हैं और देख सकते हैं कि अब क्या कहना आसान हो गया है।
3. कुछ संदेश बोलकर लिखें
जिस भाषा को सीख रहे हैं, उसमें संदेश या पोस्ट लिखते समय कभी-कभी टाइप करने के बजाय बोलकर लिखें। वॉइस टाइपिंग में वह भाषा चुनें, जो लिखना है उसे बोलें और स्क्रीन पर आए शब्द पढ़ें।
फ़ोन कभी-कभी हमारी बात पहचानने में काफ़ी नखरे करते हैं, अपनी मातृभाषा बोलने पर भी। अगर एक ही शब्द बार-बार कुछ और लिखा जा रहा है, तो उसका उच्चारण सुनें और फिर बोलकर देखें। वॉइस टाइपिंग दूसरी वजहों से भी गलत समझ सकती है, इसलिए भेजने से पहले संदेश जाँच लें।
टाइप करना भी जारी रखें और दोनों तरीकों को बदल-बदलकर इस्तेमाल करें। कुछ संदेश बोलकर लिखने से बोलने और उच्चारण पर ध्यान देने का एक और मौका मिलता है। अगर लोगों की राय का डर लगता है, तो यह अभ्यास अकेले भी कर सकते हैं।
आज इनमें से किसी एक से शुरुआत कर सकते हैं: ऑडियो संदेश भेजें, अपने दिन के बारे में थोड़ा रिकॉर्ड करें या अगला संदेश बोलकर लिखें। ज़रूरी बात यह है कि भाषा का इस्तेमाल करते समय बोलना भी आपकी नियमित आदत का हिस्सा बने, भले ही अभी पूरी तरह सहज महसूस न हो।